तुम देना साथ मेरा

तुम देना साथ मेरा

Wednesday, 25 April 2012

स्‍पर्श प्रेम का.........ज्योति जैन

प्रेम का प्रथम स्‍पर्श
उतना ही पावन व निर्मल
जैसे कुएं का
बकुल-
तपती धूप में प्रदान करता
शीतलता-
सौंधी महक लिए।
जब मिलता तो लगे
बहुत कम
लेकिन
बढते वक्‍त के साथ
भर जाता लबालब
परिपूर्ण हो जाता कुआं
हमेशा प्‍यास बुझाने के लिए
कभी न कम होने के लिए।
प्रेम का प्रथम स्‍पर्श
मानो कुएं का बकुल।
---ज्योति जैन

5 comments:

  1. वाह...............

    कोमल एहसासों से भरी रचना....
    बहुत सुंदर.

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  2. प्रेम.... एक अथाह विषय है..कितना भी और कुछ भी लिखा जा सकता है.. मगर इसकी मधुरता कभी खत्म नहीं होती

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  4. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना...

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