तुम देना साथ मेरा

तुम देना साथ मेरा

Saturday, 5 May 2012

यूँ भी होता है तुम्हारी बज़्म में.........अश्विनी कुमार विष्णु

अपना सारा जिस्म ही महका लगे
सोचना तुमको बहुत अच्छा लगे !

यूँ भी होता है तुम्हारी बज़्म में
वक़्त अपनी गोद में ठहरा लगे !

इस तरह देखो मुझे तुम आँख भर
ज़ख़्म इस दिल पर कोई गहरा लगे !

इतना घूमा हूँ तुम्हारी चाह में
ख़ूँ में हरदम कारवाँ भटका लगे !

कीजिए तो इश्क़ मौजे-नूर है
सोचिए तो धुन्ध का दरिया लगे !!


--अश्विनी कुमार विष्णु
प्रस्तुतिः सोनू अग्रवाल

1 comment:

  1. वाह! बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल..

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