तुम देना साथ मेरा

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Saturday, 30 June 2012

यादों की हरश्रंगारी महक..................अलका गुप्ता

तन -मन भिगो रही आज ...
यादों की हरश्रंगारी महक ।
अल्हड उन बतियों की चहक ।
ढलकी - ढलकी चितवन ये ।
रूखे अधरों का कंपन ये ।
बिखर गई अलकों में ...
बीते दिनों की राख सी ...
सिमट गई लाली जो ...
झुर्रियों में अनायास ही ...
कसक बहुत रही है आज ।
जो तोड़ ना सके थे कायर हाथ ।
उन बीते दिनों के अनचाहे ...
बंधनों की झूठी लाज ।।


---अलका गुप्ता

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर.................

    अनु

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    1. शुक्रिया दीदी
      अलका मेरी फेसबुक की मित्र है

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  2. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...

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    1. धन्यवाद कैलाश भाई

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