तुम देना साथ मेरा

तुम देना साथ मेरा

Friday, 13 July 2012

फिर तुम्हारी याद.................विजय कुमार सप्पति

एक छोटा सा धुप का टुकड़ा
अचानक ही फटा हुआ आकाश
बेहिसाब बरसती बारिश की कुछ बूंदे
और तुम्हारे जिस्म की सोंघी सुगंध
……और फिर तुम्हारी याद !

उजले चाँद की बैचेनी
अनजान तारो की जगमगाहट
बहती नदी का रुकना
और रुके हुए जीवन का बहना
……और फिर तुम्हारी याद !

टूटे हुए खपरैल के घर
राह देखती कच्ची सड़क
टुटा हुआ एक पुराना मंदिर
और रूठा हुआ कोई देवता
.....और फिर तुम्हारी याद !

आज एक नाम खुदा का
और आज एक नाम तेरा
आज एक नाम मेरा भी
और फिर एक नाम इश्क का
……और फिर तुम्हारी याद ..

--विजय कुमार सप्पत्ति

6 comments:

  1. कल 19/07/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. न जाने क्या क्या देख कर याद आई ... सुंदर प्रस्तुति

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    Replies
    1. दीदी प्रणाम
      आपका स्वागत ही आप ही के घर में
      सादर

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  3. Replies
    1. आप आती रहें शुक्रिया

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