तुम देना साथ मेरा

तुम देना साथ मेरा

Wednesday, 12 December 2012

झुक के हम मिलते हैं बेशक ............अन्सार कम्बरी


वक़्त है ऐसा परिंदा लौट कर आता नहीं,
जो गुज़र लाता है लम्हा खुद को दोहराता नहीं !

झुक के हम मिलते हैं बेशक गिर के हम मिलते नहीं,
जी हमारा दिल अना को ठेस पहुंचाता नहीं !

साफ-सुथरी ज़िन्दगी में बाल न पड़ता अगर,
आईना दिल का तेरी आँखों से टकराता नहीं !

दोस्तों की महफ़िलें हों चाहे हों तन्हाईयाँ,
आपको देखा है जब से कुछ हमें भाता नहीं !

'क़म्बरी' सच्चाई पर चलना तो मुश्किल है मगर,
जो भटक जाता है राहें मंजिलें पाता नहीं !


---अन्सार कम्बरी

1 comment:

  1. बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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