धरोहर

Tuesday, 18 October 2011

अपनी ही कहीं-किसी तिजोरी में....................राजीव थेपड़ा "भूतनाथ "

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कैसे समझाऊं उन लोगों को मैं कि जो धन वो चोरी-छुपे ले जा रहें हैं देश से बाहर  या फिर अपनी ही कहीं-किसी तिजोरी में उससे संवर सकती है उनक...
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Sunday, 16 October 2011

संवेदना जब तक है, कविता मरेगी नहीं............. डॉ. प्रेम दुबे

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अंततः यह कि बात चाहे "भौतिक यथार्थवाद" से उठाई जाए या गीता से, सच यह है कि चीजें कभी मरती नहीं,केवल भिन्ना रूपों में संक्रमित और व...
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Thursday, 13 October 2011

टूट जाने तलक गिरा मुझको,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हस्तीमल ’हस्ती’

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टूट जाने तलक गिरा मुझको कैसी मिट्टी का हूँ बता मुझको मेरी ख़ुशबू भी मर न जाये कहीं मेरी जड़ से न कर जुदा मुझको ...
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ठहराव ज़िन्दगी में दुबारा नहीं मिला.............देवी नागरानी

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ठहराव ज़िन्दगी में दुबारा नहीं मिला जिसकी तलाश थी वो किनारा नहीं मिला वर्ना उतारते न समंदर में कश्तियाँ तूफ़ान ...
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Tuesday, 11 October 2011

ओ बंजारे दिल आओ चलें अब घर अपने................ललित कुमार

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ग़नुक (ग़ज़ल नुमा कविता) … ओ बंजारे दिल आओ चलें अब घर अपने घर से दूरी है लगी दिखाने असर अपने पीछे पड़ी रह जाएगी वो ख़ाक कहेगी तय हमनें किस ...
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गल्तियाँ सबक हैं............आशा गोस्वामी

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ठोकर लगने के अनज़ाने से डर से बढ़ते कदम यूं नहीं सहमा करते... और जो थम जायें राह में कहीं वो नादां मंजिल नहीं चूमा करते.. ठुकराये गए अहसासों...
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Friday, 7 October 2011

तू हर इक बात पे बरपेगा ...........................राजीव थेपड़ा 'भूतनाथ'

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गज़ब.....पता नहीं कहाँ-कहाँ,कब-कब,क्या-क्या कुछ लिखा जा चुका है...कि जिस पर कुछ भी कहना नाकाफी लगता है....उसपर तो कुछ नहीं कह पाउँगा...मग...
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