धरोहर
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एक और शाम
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Thursday, 14 December 2017
एक और शाम....
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एक और शाम उतर आयी आँखों में भर गयी नम किरणें खुला यादों का पिटारा... भीग गयी पलकें फैलकर उदासी धुंधला गयी चाँद को झोंका सर्द...
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