तुम देना साथ मेरा

तुम देना साथ मेरा

Thursday, 7 December 2017

बयां करेगी किस्से


ऐ कविता
एक तलब सी 
बन गई हो 
इस जिंदगी में तुम......
जो बिन तुम्हारे 
अधूरी सी 
हो चली है.......
हर सपनो में तुम 
और 
तुम में ही 
हर सपना है मेरा.........
जानता हूँ 
दिल में रखे 
ये मोहब्बत के पन्ने 
एक रोज
उड़ जाएंगे हवा में
काफूर बन के…....
फिर भी 
कम नहीं होती 
ये तलब 
तेरे प्यार की......
सोचता हूँ 
ये क्या कम है 
कि जिंदगी 
खामोश होकर भी 
बयां करेगी किस्से 
-यशोदा
मन की उपज

Wednesday, 6 December 2017

कहाँ से आएगी माँ....


सोनोग्राफी क्लिनिक के अन्दर
एक महिला ने
थरथराते होठों से
एकान्त में..कहा
घर वाले मेरा ..
करवाना चाहते हैं
परीक्षण
जानना चाहते वे
लड़का है या फिर लड़की
अन्तरात्मा मेरी
धिक्कारती है मुझको
मैडम आप ही 
कोई दीजिए सुझाव
कह दीजिए आप
अगर 
आपने यह परीक्षण करवाया
तो प्रसव मैं नही करवा सकती..
हाँ,"मैडम ने कहा"
वैसे भी गलत भी 
हो जाते हैं कई टेस्ट 
सौ प्रतिशत 
कोई नहीं बता सकता
फिर मैडम ने कहा
क्यों नही चाहती आप??
क्या नहीं चाहिए बेटा??
लड़की तो हैं न एक फिर
ये खतरा क्यूँ...
वो महिला बोल पड़ी....
खतरा...
हाँ लड़की जन्मना 
खतरा ही तो है
पर,मैडम जी जब
एक माँ ऐसा सोचने लगे
तो फिर माँ कौन बनेगा
ये सृष्टि कैसे चलेगी???
-यशोदा..
मन की उपज

Tuesday, 5 December 2017

उड़ चला है वक्त.....


वक्त है
या नहीं है वक्त
वक्त का क्या
बीतता जाता है
कोसना वक्त को
मूर्खता है निरी
अनमोल देन है ये
वक्त.....दाता की
नेमत है ये वक्त
वक्त का...
हर लम्हा अकूत मूल्य
रखता है... जुड़ें रहें
इस वक्त से..आप
थाम नहीं सकते...
वक्त को...आपको
चलना ही होगा साथ
वक्त के....कोशिश
कीजिए मुस्कुराने की
वक्त के साथ..
हमें कोई... 
इख़्तियार नहीं
वक्त की चाल पर 
फिर भी हर पल
दावा पेश करते हैं
वक्त के अपना होने का
- यशोदा
मन की उपज



Wednesday, 22 November 2017

एक स्वप्न नया...


राहें नई..
आयाम नया
हुई विधा नयी
पर कलम वही...

अनुभव नए
शब्द नए
दर्द भी नया
पर कलम वही...


मनन नया
चिन्तन नया
भाव नये
पर कलम वही

दवात नया
कागज नयी
सियाही नयी
पर कलम वही

डायरी नयी
कव्हर नया
पन्ना कोरा
पर कलम वही

एक स्वप्न नया
एक कवि नया
एक कविता नयी
पर कलम वही...

-यशोदा
मन की उपज


Thursday, 16 November 2017

रूठे हैं अपने ही.....



रूठे हैं अपने ही
तो हुआ क्या
साथ ही तो छूटा
तो हुआ क्या
एक तिनका ही टूटा 
नीड़ का ...बस
एक पुल ही टूटा 
उम्मीदों का
हुई राहें
बेगानी.
उलझकर काँटों से
बनी दर्द की 
नयी एक कहानी
कोई ज़ख़्म पुराना
हुआ ताजा
राह में ज़िन्दगी के
पर,तुम न हो ख़फ़ा
खुद से ज़रा भी
है न रास्ता...
देखो टटोलकर
बटोरकर
हौसला
देखो पलट कर
वो साया है
तुम्हारा ही..
तलाशो उसे
अपने भीतर
भूलकर अंधेरे को
जला लो फिर से
एक बाती 
वजूद की 
शिनाख्त के लिए
अंतर्मन के कोने में
-यशोदा
मन की उपज


Saturday, 11 November 2017

समाई हुई हैं इसी जिन्दगी में



क्या है...
ये कविता..
क्यों लिखते हैं....
झांकिए भीतर
अपने जिन्दगी के
नजर आएगी  एक
प्यारी सी कविता

सुनिए ज़रा
ध्यान से...
क्या गा रही है 

ये कविता....
देखिए इस नन्हें बालक
की मुस्कुराहट को
नज़र आएगी एक
प्यारी सी
मुस्काती कविता....

दिखने वाली
सभी कविताएँ

जिनमें..
हर्ष है और
विषाद भी है

सर्जक है
विध्वंसक भी है

इसमे संयोग है...
और वियोग भी है

है पाप भी
और प्रेम का
प्रदर्शन का
संगम है

समाई हुई हैं
इसी जिन्दगी में

ये प्यारी सी 
कविता
-यशोदा
मन की उपज
 


Thursday, 9 November 2017

पन्ना एक पलटने के बाद....


भाषा और
ज्ञान के बाद भी
बाकी है बहुत कुछ
ये भाषाएँ
ये ज्ञान की बातें
रहने दीजिए..सीमित
समझता है कौन
आज के इस युग में

इन बातों को...
युग की बात को
युग तक ही रखें...

आज-कल..
इस तरह की भाषा
और ज्ञान भी इसी
तरह का चाहिए..
मसलन..

मौसम मन का
हो जाता है अजीब...
रहता है हरदम...
आवाज के बगैर..
रहता है दर्द 
रिसता है मन का
बुझती सी है
खुशियाँ..
आँगन की...
पन्ना एक पलटने के बाद
आ जाती वापस...
सुगंध एक मादक सी
काफूर हो जाता है
दर्द मन का..

खिल जाते हैं फूल
बिखरता है मकरंद
-यशोदा
मन की उपज