धरोहर
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एक ज्वलन्त प्रश्न को उठाती कविता
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एक ज्वलन्त प्रश्न को उठाती कविता
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Tuesday, 13 December 2011
सिमट गई सूरज के रिश्तेदारों तक ही धूप.....डॉ. जगदीश व्योम
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सिमट गई सूरज के रिश्तेदारों तक ही धूप न जाने क्या होगा घर में लगे उकसने काँटे कौन किसी का क्रंदन बाँटे अंधियारा है गली गली ...
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