धरोहर
Saturday, 24 September 2011
मेरा ही कदम पहला हो............ यश चौधरी
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मेरा ही कदम पहला हो, उस जहाँ की तरफ, जिसकी ख्वाहिश मुझमें है जो ख्वाब उन सूनी आँखों ने देखा ही नहीं, उसे पूरा करने की गुंजाइश मुझमें है खु...
अश्क़ बन कर जो छलकती रही.........द्विजेन्द्र ‘द्विज’
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अश्क़ बन कर जो छलकती रही मिट्टी मेरी शोले कुछ यूँ भी उगलती रही मिट्टी मेरी मेरे होने का सबब मुझको बताकर यारो मेरे सीने में धड़कती रही मिट्टी म...
अजीब अन्दाज़ की ये ज़िन्दगी महसूस होती है.......डॉ. फ़रियाद "आज़र"
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अजीब अन्दाज़ की ये ज़िन्दगी महसूस होती है भली मालूम होती है, बुरी महसूस होती है ये साँसें भी मुसलसल खुदकुशी का नाम हैं शायद मैं जितना जीता हूँ...
औरतों के जिस्म पर सब मर्द बने हैं.......रवि कुमार
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औरतों के जिस्म पर सब मर्द बने हैं मर्दों की जहाँ बात हो, नामर्द खड़े हैं शेरों से खेलने को पैदा हुए थे जो नाज़ुक़ किसी के बदन से वो खेल...
गर बेटियों का कत्ल यूँ ही कोख में होता रहेगा.........डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ’अरुण’
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गर बेटियों का कत्ल यूँ ही कोख में होता रहेगा! शर्तिया इन्सान अपनी पहचान भी खोता रहेगा!! मर जायेंगे अहसास सारे खोखली होगी हँसी, साँस लेती देह...
Wednesday, 21 September 2011
जिन्दगी का कसूरवार हूँ ..............यश चौधरी
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खुद अपने आप पे मुझको था ऐतबार बहुत अब अपने आप से रहता हूँ होशियार बहुत वो जिसने कोई भी वादा नहीं किया मुझसे उस एक शख्स का रहता है इंतज़ा...
5 comments:
शहनाई-शहनाई है..............यश चौधरी
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चाहे जितना कष्ट उठा ले, अच्छाई-अच्छाई है। खुल जाता है भेद एक दिन, सच्चाई-सच्चाई है। होती है महसूस जरूरत, जीवन में इक साथी की, तनहा जीवन ...
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