धरोहर

Thursday, 29 September 2011

अदब से झुकने की तहज़ीब खानदान की है .............सचिन अग्रवाल 'तन्हा'

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हवा जो नर्म है ,साज़िश ये आसमान की है वो जानता है परिंदे को ज़िद उड़ान की है............ मेरा वजूद ही करता है मुझसे ग़द्दारी नहीं तो उठने की औ...
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दिल के छालों का ज़िक्र आता है................................शरद तैलंग

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दिल के छालों का ज़िक्र आता है। उनकी चालों का ज़िक्र आता है। प्यार अब बाँटने की चीज़ नहीं, शूल भालों का ज़िक्र आता है। सूर म...

वाह क्या बात है............महेंद्र प्रताप सिंह

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वाह क्या बात है सरकार बहुत ही स्मार्ट है समस्याओं से निपटने के कई तरीके इसके पास हैं साइन करना सिख लो निरक्षर से साक्षर आप हैं| कहते ...
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Saturday, 24 September 2011

इन उजालों के शहर में.....प्रकाश नारायण

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इन उजालों के शहर में सिर्फ अंधियारा बचा है आइए कुछ दीप अपनी आत्मा के हम जलाएं                                       यूँ यहाँ पर रोश...
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मेरा ही कदम पहला हो............ यश चौधरी

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मेरा ही कदम पहला हो, उस जहाँ की तरफ, जिसकी ख्वाहिश मुझमें है जो ख्वाब उन सूनी आँखों ने देखा ही नहीं, उसे पूरा करने की गुंजाइश मुझमें है खु...

अश्क़ बन कर जो छलकती रही.........द्विजेन्द्र ‘द्विज’

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अश्क़ बन कर जो छलकती रही मिट्टी मेरी शोले कुछ यूँ भी उगलती रही मिट्टी मेरी मेरे होने का सबब मुझको बताकर यारो मेरे सीने में धड़कती रही मिट्टी म...

अजीब अन्दाज़ की ये ज़िन्दगी महसूस होती है.......डॉ. फ़रियाद "आज़र"

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अजीब अन्दाज़ की ये ज़िन्दगी महसूस होती है भली मालूम होती है, बुरी महसूस होती है ये साँसें भी मुसलसल खुदकुशी का नाम हैं शायद मैं जितना जीता हूँ...
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