धरोहर

Wednesday, 27 December 2017

ना जाने कितने मौसम बदलेंगे.....

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ना जाने कितने मौसम बदलेंगे ना जाने कितने लोगों से कितनी मुलाकातें बची है? न जाने कितने दिन कितनी रातें बची हैं? ना जाने कितना रोन...
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Sunday, 17 December 2017

फिर अंकुरित हो जाती है

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पत्ते झड़ते रहते हैं शाखाएँ भी कभी टूट जाती है पर वृक्ष... खड़ा रहता है निर्विकार..निरन्तर उस पर  नई शाखाएँ  आ जाती है नवपल्लव भी दिखा...
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Thursday, 14 December 2017

एक और शाम....

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एक और शाम उतर आयी आँखों में भर गयी नम किरणें खुला यादों का पिटारा... भीग गयी पलकें फैलकर उदासी  धुंधला गयी चाँद को  झोंका सर्द...
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Thursday, 7 December 2017

बयां करेगी किस्से

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ऐ कविता एक तलब सी  बन गई हो  इस जिंदगी में तुम...... जो बिन तुम्हारे  अधूरी सी  हो चली है....... हर सपनो में तुम  और  तुम में ह...
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Wednesday, 6 December 2017

कहाँ से आएगी माँ....

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सोनोग्राफी क्लिनिक के अन्दर एक महिला ने थरथराते होठों से एकान्त में..कहा घर वाले मेरा .. करवाना चाहते हैं परीक्षण जानना चाहते वे ...
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Tuesday, 5 December 2017

उड़ चला है वक्त.....

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वक्त है या नहीं है वक्त वक्त का क्या बीतता जाता है कोसना वक्त को मूर्खता है निरी अनमोल देन है ये वक्त.....दाता की नेमत है ये वक्...
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Wednesday, 22 November 2017

एक स्वप्न नया...

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राहें नई.. आयाम नया हुई विधा नयी पर कलम वही... अनुभव नए शब्द नए दर्द भी नया पर कलम वही... मनन नया चिन्तन नया भाव नये पर कलम वही ...
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yashoda Agrawal
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