धरोहर
Monday, 29 January 2018
हो रहे पात पीत
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हो रहे पात पीत सिकुड़ी सी रात रीत ठिठुरन भी गई बीत गा रहे सब बसंत गीत भरी है मादकता तन-मन-उपवन मे. समय होता यहीं व्यतीत ...
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Tuesday, 9 January 2018
जलता रहता है अलाव एक
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जाने के बाद तुम्हारे अक्सर ख़्यालों में तुमसे मिलकर लौटने के बाद हल्की-हल्की आँच पर खदबदाता रहता है तुम्हारा एहसास लिपट कर ...
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Wednesday, 3 January 2018
आनन्द प्रेम का...
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आनन्द प्रेम का... असम्भव है शब्दों में बता पाना और ये भी कि क्या है प्रेम का कारण... यह गूंगे का गुड़ है देह, मन, आत्मा का...
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Wednesday, 27 December 2017
ना जाने कितने मौसम बदलेंगे.....
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ना जाने कितने मौसम बदलेंगे ना जाने कितने लोगों से कितनी मुलाकातें बची है? न जाने कितने दिन कितनी रातें बची हैं? ना जाने कितना रोन...
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Sunday, 17 December 2017
फिर अंकुरित हो जाती है
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पत्ते झड़ते रहते हैं शाखाएँ भी कभी टूट जाती है पर वृक्ष... खड़ा रहता है निर्विकार..निरन्तर उस पर नई शाखाएँ आ जाती है नवपल्लव भी दिखा...
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Thursday, 14 December 2017
एक और शाम....
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एक और शाम उतर आयी आँखों में भर गयी नम किरणें खुला यादों का पिटारा... भीग गयी पलकें फैलकर उदासी धुंधला गयी चाँद को झोंका सर्द...
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Thursday, 7 December 2017
बयां करेगी किस्से
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ऐ कविता एक तलब सी बन गई हो इस जिंदगी में तुम...... जो बिन तुम्हारे अधूरी सी हो चली है....... हर सपनो में तुम और तुम में ह...
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