धरोहर
Wednesday, 22 November 2017
एक स्वप्न नया...
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राहें नई.. आयाम नया हुई विधा नयी पर कलम वही... अनुभव नए शब्द नए दर्द भी नया पर कलम वही... मनन नया चिन्तन नया भाव नये पर कलम वही ...
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Thursday, 16 November 2017
रूठे हैं अपने ही.....
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रूठे हैं अपने ही तो हुआ क्या साथ ही तो छूटा तो हुआ क्या एक तिनका ही टूटा नीड़ का ...बस एक पुल ही टूटा उम्मीदों का हुई राहें...
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Saturday, 11 November 2017
समाई हुई हैं इसी जिन्दगी में
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क्या है... ये कविता.. क्यों लिखते हैं.... झांकिए भीतर अपने जिन्दगी के नजर आएगी एक प्यारी सी कविता सुनिए ज़रा ध्यान से... क्या गा र...
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Thursday, 9 November 2017
पन्ना एक पलटने के बाद....
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भाषा और ज्ञान के बाद भी बाकी है बहुत कुछ ये भाषाएँ ये ज्ञान की बातें रहने दीजिए..सीमित समझता है कौन आज के इस युग में इन बातों को... यु...
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Tuesday, 7 November 2017
भूल-भुलैय्या......
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भाषा में होता है ज्ञान और... अपना ज्ञान भी होता है भाषा का छोटे शब्दों में कहिए तो भाषा यानि ज्ञान भी न मौन है भाषा और न ही ज्ञान...
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Monday, 6 November 2017
ऐसे ही अज्ञानी सर्वत्र हैं....
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ज्ञान... किसी घराने की अनुशंसा नहीं कि किसी ने कहा और कोई अमर हो गया कालजयी बन गया इतना भी नहीं तो वर्ष का सर्वश्रेष्ठ हो गया...
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Sunday, 5 November 2017
ज्ञान की भाषा....मन की उपज
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ज्ञान की.... भाषा ज्ञान होता है और इसे पाएं कैसे... एक प्रश्न है जटिल .... कहा जाता है भाषा से होती है पैदाइश ज्ञान की ये भी...
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