धरोहर

Friday, 13 September 2019

हिन्दी में हैं हम..

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हिस्सा है हिन्दी हमारे अस्तित्व का ... ये वो पुल है जो... ले जाती है सुखों तक पहुंचाती है हमें संतुष्टि के शिखरो पर जोड़ती है..ह...
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Monday, 24 June 2019

बड़प्पन

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बड़प्पन मायके आयी रमा, माँ को हैरानी से देख रही थी। माँ बड़े ध्यान से  आज के अखबार के मुख पृष्ठ के पास दिन का खाना सजा रही थी। दाल, रोट...
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Wednesday, 29 May 2019

ज़िंदगी के मायने और है

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आज की चाहतें और है कल की ख़्वाहिशें और हैं जो जीते है ज़िंदगी के पल-पल को उसके लिये ज़िंदगी के मायने और है हसरतें कुछ और हैं वक़्...
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Monday, 11 March 2019

तुमसे मिलने के बाद.......अज्ञात

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तुम्हे जाने तो नही देना चाहती थी .. तुमसे मिलने के बाद पर समय को किसने थामा है आज तक हर कदम तुम्हारे साथ ही रखा था ,ज़मीं प...
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Wednesday, 30 January 2019

शब्दों का खेत

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'शब्दों के खेत' में आओ खामोशियों को बोएँ तितलियों के पंखो को सपनो की जादुई छड़ी से सहलाएं.... अंतर्मन की आंखो से बीते हुए ...
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Wednesday, 9 May 2018

सरेआम भले ही हो....यशोदा

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उसे पाने की  कोशिश का चढ़ा है नशा.. है आ रही महक गुलाब की रात देखा था  इक ख़्वाब सा किया था हमने इज़हार प्यार का कर रहा हूँ इन्ते...
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Thursday, 12 April 2018

अहिल्या को नहीं भुगतना पड़ेगा.....मन की उपज

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विडम्बना  यही है की  स्वतंत्र भारत में  नारी का  बाजारीकरण किया जा रहा है, प्रसाधन की गुलामी,  कामुक समप्रेषण  और विज्ञापनों के जर...
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