धरोहर
Saturday, 7 March 2020
जिजीविषा ....मन की उपज
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स्त्रियों का हास्य बोध और जिजीविषा गिन नहीं पाएँगे आप कितनों के निशाने पर रहती है स्त्री हारी नहीं फिर भी रहती है हरदम जूझती कभी ...
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Friday, 13 September 2019
हिन्दी में हैं हम..
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हिस्सा है हिन्दी हमारे अस्तित्व का ... ये वो पुल है जो... ले जाती है सुखों तक पहुंचाती है हमें संतुष्टि के शिखरो पर जोड़ती है..ह...
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Monday, 24 June 2019
बड़प्पन
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बड़प्पन मायके आयी रमा, माँ को हैरानी से देख रही थी। माँ बड़े ध्यान से आज के अखबार के मुख पृष्ठ के पास दिन का खाना सजा रही थी। दाल, रोट...
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Wednesday, 29 May 2019
ज़िंदगी के मायने और है
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आज की चाहतें और है कल की ख़्वाहिशें और हैं जो जीते है ज़िंदगी के पल-पल को उसके लिये ज़िंदगी के मायने और है हसरतें कुछ और हैं वक़्...
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Monday, 11 March 2019
तुमसे मिलने के बाद.......अज्ञात
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तुम्हे जाने तो नही देना चाहती थी .. तुमसे मिलने के बाद पर समय को किसने थामा है आज तक हर कदम तुम्हारे साथ ही रखा था ,ज़मीं प...
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Wednesday, 30 January 2019
शब्दों का खेत
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'शब्दों के खेत' में आओ खामोशियों को बोएँ तितलियों के पंखो को सपनो की जादुई छड़ी से सहलाएं.... अंतर्मन की आंखो से बीते हुए ...
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Wednesday, 9 May 2018
सरेआम भले ही हो....यशोदा
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उसे पाने की कोशिश का चढ़ा है नशा.. है आ रही महक गुलाब की रात देखा था इक ख़्वाब सा किया था हमने इज़हार प्यार का कर रहा हूँ इन्ते...
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