तुम देना साथ मेरा

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Tuesday, 7 February 2012

मील के पत्थर...............रचनाकार...नामालूम(कृपया बताएं)

ना तो मैं हताश हूँ, ना ही मैं निराश हूँ|
पर अपनी कमरफ्तारी पर, थोड़ा सा उदास हूँ||

कुछ कमी है रौशनी की अभी, रास्ते भी कुछ धुंधले से हैं|

कभी दूर हूँ मैं रास्ते से, तो कभी रास्ते के पास हूँ ||

कर रहा है प्रश्न निरंतर, ये विचारों का अस्पष्ट प्रवाह|

किसी की तलाश में हूँ मैं, या खुद किसी की तलाश हूँ ||

गतिमान है प्रबल संघर्ष, कामनाओं के ज्वार-भाटे से|
इच्छाओं पर अंकुश है मेरा, या कामनाओं का दास हूँ||

चेहरा तो एक ही है मेरा, इन्सान बहुत से हैं अंदर|
कभी कृष्ण की मुरली हूँ, कभी कंस का अट्टहास हूँ||

यूँ तो आम आदमी हूँ, इक आम जिन्दगी जीने वाला|
पर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिये मैं खास हूँ||

माना कि कदम धीमे हैं, पर सफर अभी जारी है|
इसमें कोई आश्चर्य नहीं, कि मील के पत्थर तलाश लूँ||
रचनाकार...नामालूम(कृपया बताएं)

Sunday, 27 November 2011

नारी शक्ति................चरणलाल

नारी चाहे तो आकाश धरा पर लादे
नारी चाहे तो धरती को स्वर्ग बना दे
नारी ने विपदा झेली है
नारी शोलों से खेली है
नारी अंगारों पर चलकर
अंगारों की ताप मिटा दे
नारी चाहे तो पत्थर को पानी कर दे
और पानी में आग लगादे
नारी चाहे तो आकाश धरा पर लादे
नारी चाहे तो धरती को स्वर्ग बना दे
नारी नर की निर्माता है
नारी देवों की माता है
नारी नर को शक्ति देती
नारी से नर सुख पाता है
नारी जो चाहे सो करदे
गागर में सागर को भर दे
तूफानों से टक्कर लेले
मरुभूमि में पुष्प खिला दे
नारी चाहे तो आकाश धरा पर लादे
नारी चाहे तो धरती को स्वर्ग बना दे
यूं तो नारी अबला बनकर
पत्थर का भी दिल हर लेती
मानवता की रक्षा हेतु
कभी भयंकर नागिन बनकर
बड़े विषधरों को डस लेती
और पुरुष जब टेढा चलकर
अपने घर को छत्ती पहुंचाए
इस संकट में नारी बुद्धि
नर के पथ को सीधा कर दे
नारी चाहे तो आकाश धरा पर ला दे
नारी चाहे तो धरती को स्वर्ग बना दे .

"चरण"
गुरुवार, जून- 23, 2011

मैं यशोदा की वो बेटी.........आभा बोधिसत्व

मैं यशोदा की वो बेटी
जिसे ना नन्द बाबा ने बचाया ना वासुदेव ने
दोनों पिता थे और दोनों ने मिलकर मारा मुझे
ये तो अच्छी बात नहीं

सोती रही यशोदा माता
उसे तो यह भी नहीं पता
उसने जना था बेटी या बेटा !

बेटे की रक्षा के लिए मारी गयी बेटी
बेटा जुग जुग जिए
बेटा राज करे
कह -कह कर मारी गयी बेटी

कंस मामा ने तो बाद में मारा
उससे पहले पिता ने कंस मामा के हाथो में सौप कर
कंस मामा ने तो पत्थर पर पटका था केवल !

बेटी हू जानकार
गिर्द्गिदायी माँ देवकी
मरी मैं
बचा तुम्हारा बेटा
मैं मरी और मरती रही तब से अब तक
तब मरी कृष्ण के लिए
अब मरती हू किसी
मोहन,मुन्ना,दीपक के लिए
इन्ही कुल दीपक केलिए
बुझती रही मैं बार बार
ताकि कुल रहे उजियार
जिए जागे गाती रही मैं
तब भी
मरती रही मैं........
क्यूंकि मैं बेटी थी तुम्हारी
मुझे तो मरना ही था
तुम ना मारते पिता तो कोई दुर्योधन मारता मुझे
सभा के बीच साड़ी खीच कर
मुझे तो मरना ही था !!!!!!


प्रस्तुत कर्ताः सिद्धार्थ सिन्हा

Tuesday, 15 November 2011

चेतावनी.....................चरऩ लाल

चेतावनी
मैंने अपने बच्चे से कह दिया है
अभी से
थोड़ा थोड़ा विष पीना प्रारंभ कर दे
ताकि
मेरी आँख बंद होने तक
तू इतना जहरीला हो जाए
कि ये दुम हिलाउ कुत्ते
जो पूरे के पूरे जहर में बुझे हुये हैं
जब तुझे काटने को लपके
तो तेरी जहरीली गंध मात्र से
बेहोश होकर छटपटाने लगे
तब मेरी आत्मा कहीं दूर
अथाह प्रसन्नता से नाच उठाएगी
और में समझूंगा जीकर ना सही
किंतु मरकर मैंने कुछ पा लिया है
मेरे बच्चे
ये सांप
नीले -पीले -हरे -लाल -काले -सफेद
सब एक ही हैं धोखा मत खाना
इन सबकी जुबान पर इंसानियत का खून लगा है
तेरा कुनकुना खून चातने के लिए
जब इनकी जीभ लपलपाये
तू दूर मत भागना
अपितु
सीना तानकर सामने खड़े हो जाना
क्यों कि तेरे अन्तर में समाविष्ट विष
इतनी क्षमता रखता है
कि
जो तुमसे टकरायेगा
चूर चूर हो जायेगा .

----"चरण"